Friday, December 28, 2012


लावारिसी से आहत राष्ट्रीय राजमार्ग-65
चूरू 30 मई। शहर के हृदयस्थल से गुजरता राष्ट्रीय राजमार्ग-65 लावरिसी से आहत है। अग्रसेन नगर रल्वे क्रासिंग से रामनगर तिराहे तक की लगभग पांच किलोमीटर सडक जगह जगह से उखड चुकी है। सबसे ज्यादा बुरा हाल तो धर्मस्तुप मोड से रेल्वे फाटक का है जहां सडक में बने गढ्ढों में भी गढ्ढे बन चुके हैं और डामर की सडक़ को खोजना पड़ रहा है । ट्रैफिक के बढते बोझ तथा औवरलोड वाहनों ने घायल राजमार्ग के जख्मों को और अधिक गहरा कर दिया है लेकिन जिला परिवहन अधिकारी  ने भी इस ओर से अपना मुंह फैर रखा है। सर्वाधिक व्यस्तता वाले इस मार्ग पर प्रतिदिन सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों छोटे बडे वाहन गुजरते है। इन गहरे गढ्ढों से बचने के लिए ना केवल वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते है अपितु चालक भी घायल हुए हैं। मार्ग की हालत ऐसी दयनीय है कि महज कुछ मिनट के सफर में घंटों का समय लग रहा है क्योंकि यहां मौजूद गहरे-गहरे गढ्ढे, वाहनों की गति को रोक रहे है। मार्ग पर कोई वाहन खराब या दुर्घटटनाग्रस्त हो जाता है तो लम्बे समय तक रास्ता जाम हो जाता है। आये दिन हो रही दुर्घटनाओं से राजमार्ग के आसपास रह रहे लोगों में भय व्याप्त है। पिछले दिनों इन्ही गढ्ढों के कारण तेजाब से भरा टैंकर पलट गया था, जिसकी गंध को यहां के बाशिन्दे अभी भी महसुस करते हैं। इस पर अवैध अतिक्रमण की बाढ के कारण राजमार्ग कुछ सिमट सा गया है। यह तो हालात हैं राजमार्ग के और इधर सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यालय का आलम यह है कि ना केवल अधिशाषीअभियन्ता अपितु सहायक अभियन्ता का पद भी रिक्त पडा है।  8 दिसम्बर 2011 से नागौर के अधिशाषी अभियन्ता को चूरू का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया लेकिन नासूर बन चूकी राजमार्ग की इस समस्या से उन्हे बचते देखा जा सकता है। इससे भी बुरा हाल सहायक अभियन्ता पद का है, यह पद 2007 के बाद से ही अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहा है। देखा जाये तो विभाग की गाडी को एडिशनल चार्ज के भरोसे ही घसीटा जा रहा है। ऐसे में राजमार्ग के सीने पर बन चुके घावों का उपचार करने वाला कोई नहीं है।
सावधान ! दुर्घटना सम्भावित क्षैत्र 
अग्रसेन नगर रल्वे क्रासिंग से रामनगर तिराहे तक राष्ट्रीय राजमार्ग का हाल यह है कि आमजन इसे दुर्घटना सम्भावित क्षैत्र बताने लगा है। सडकों पर दुर्घटनाओं को निमन्त्रण देते गढढों को देखकर यह बात चरितार्थ भी होती है। भ्रष्टाचार की गर्त में बनी हुई सडक़ों पर इतने बड़े बड़े गड्ढे है कि जिसमें छोटी गाडिय़ां पूरी समा जाये। आये दिन धर्मस्तुप के बाद मोड पर ट्रक,टैक्सी इत्यादि पलटना आम बात हो गयी। इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन अपने व सामने से आ रहे वाहन को बचाने के कारण गढ्ढों में वाहन को उतार देते है और इससे वाहन असंतुलित होकर पलट जाता है जिससे कई दुर्घटनाऐं ऐसी हो जाती है जिनसे न केवल जनहानि होती है बल्कि भारी नुकसान भी हो जाता है ज्ञातव्य है कि इसी राजमार्ग से कई स्कूली वाहन भी गुजरती है, इन गढ्ढों के कारण किसी बडे हादसे की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इसी प्रकार शहर के हदय स्थल धर्मस्तूप के निकट सडक़  में बने गड्ढों के कारण मोटर साइकिल असंतुलित होकर गिरने से एक युवक अनिल जांगिड असमय ही काल का ग्रास बन गया था।
समाचार पत्रों में बार बार राष्ट्रीय राजमार्ग 65 की बदहाली पर लिखे जाने के बावजूद भी प्रशासन द्वारा केवल औपचारिक आदेश निर्देश दिये जाते रहें लेकिन यर्थाथ में समस्या समाधान का कोई काम नहीं किया गया है।
घातक बिमारियों को न्यौता दे रही है गढढों में बनी सडकें
राष्ट्रीय राजमार्ग के ना केवल दोनो किनारों पर अपितु इसमें बने गढ्ढे भी धूल-गर्द से अटे पडे हैं। दुसरी ओर पेचिंगवर्क के नाम पर गन्दी मिटटी ओर कचरा डालकर गढढों का भरने का प्रयास किया जा रहा है जिससे प्रदुषित धूल एव धूएं के गुब्बार से श्वास एवं फें फ डे के रोग-दमा, टीबी, अस्थमा, एलर्जी, जुकाम जैसी गम्भीर बिमारियों के होने की संभाावना से भी इंकार नहीं किया जाता सकता है। इसके साथ ही खराब एवं गढ्ढों वाली सडकों पर सफर करने से रीढ की हड्डी में स्पाइन रोग का खतरा भी बढ जाता है।
कौन है जिम्मेवार
सडक के गढ्ढों में संस्थाओं,दुकानों एवं मकानों से आया पानी भरा रहता है। यह सडक को और अधिक क्षतिग्रस्त कर रहा है। शहरी क्षैत्र में सडक के दोनों और बनी नालियों की समय पर सफाई नहीं होने के कारण सडक पर पानी इक्टठा हो जाता है, साथ ही पेयजल लाइनों में लीकेज होने से सडकेें टूटती है। इस सम्बन्ध में समय समय पर विभाग द्वारा नगरपालिका,जलदाय विभाग, केन्द्रीय विद्यालय आदि को नोटिस भी दिया जा चुका है। जलदाय विभाग द्वारा समय समय पर राजमार्ग के नीचे पुरानी हो चली पाईप लाईन की मरम्मत के लिए सडक को तोडना आम बात है, जिससे बने गढ्ढे सम्बन्धित विभाग द्वारा समय रहते दुरूस्त नहीं करवाये जाते। पानी सप्लाई के लिए गत दिनों आरयूआईडीपी ने पाईप लाइन डालने के लिए बडे-बडे गढ्ढे बना दिये थे जिनको आज तक पुरी तरह ठीक नहीं करवाया गया है। इसी प्रकार भारत संचार निगम भी गढ्ढों को भरने में लापरवाही करता रहा है। सार्वजनिक निर्माण विभाग,इसे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का काम होने की बात कहकर जिम्मेवारी से बच रहा है।
मरम्मत के लिए चाहिए 611.2 लाख रूपये
मुख्यमन्त्री जहां संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के लिए जिले में ‘जवाबदेही’ कार्यक्रम, प्रशासन शहरों के संग आदि जनकल्याणकारी योजनाओं को यथार्थ के धरातल पर लाना चाहते हें वहीं अकर्मण्य जनप्रतिनिधि एवं मूक प्रशासन ने इन योजनाओं को मात्र कागजों का पुलिन्दा बना दिया है। शहर के बीच से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग की हालत बेहद खस्ताहाल है। शहर का व्यस्ततम मार्ग होने के बावजूद प्रशासन द्वारा इस पर बजरी,मिट्टी आदि डलवाने की भी जरूरत नहीं समझी जा रही है। विभागीय अधिकारियों (एनएच)ने बताया कि जयपुर रोड रेल्वे क्रोसिंग से रामनगर तिराहा तक सीसी रोड यदि बनवा दी जाये तो इस समस्या का समाधान स्थायी रूप से हो सकता है, लेकिन इसे बनवाने के लिए कम से कम 611.2 लाख रूपये की जरुरत पड़ेगी। इस बजट के बाबत मुख्य अभियन्ता को लिखा जा चुका है लेकिन इस वित्तीय वर्ष में इसके मिलने की उम्मीद भी कम ही दिखाई दे रही है। 2011-12 में 63 लाख का बजट पैंचिग वर्क एवं मरम्मत के लिए आया था, लेकिन विभाग ने बजट से कहीं ज्यादा का कार्य करवा दिया जिससे अभी भी 1.36 लाख का भुगतान करना बकाया है। ।
आ रहा है बारिश का मौसम
लगभग एक महिने बाद मानसुन प्रदेश में दस्तक देने लगेगा। जिससे डामर से बनी सडक ों की बारिश के चलते स्थिति और भी भयावह एवं विकट हो जायेगी।  जब बिना बरसात के ही ऐसा हाल है तो बारिश के दिनों में कहीं पुरा राजमार्ग बहकर ही न चला जाये। सडक़ में बड़े-बड़े गड्ढ़ों के कारण बारिश के दिनों में तो स्थिति और भी दयनीय हो जाती है जब सडक़ में भरे पानी के कारण वाहन चालक सडक़ पर गिरकर चोटग्रस्त होते हैं। कच्चा माल, ज्वलनशील पदार्थ, कैमिकल आदि लेकर जाने वाले सैंकड़ों ट्रक व ट्राले भी इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं, जिनके इन गड्ढ़ों में फंस जाने की सम्भावना बनी रहती है। बरसाती और स्थानीय पानी बहने के कारण यह सडक़ टूटनी आरंभ हुई थी जिसकी नेशनल हाईवे प्रधिकरण और नगर निगम एंव जिला प्रशासन ने अनदेखी कर दी।
न्यायालय ने जांच के लिए नियुक्त किया कमिश्नर
शहर के जागरूक नागरिकों द्वारा सडकों की बदहाली को लेकर गत दिनो न्यायालय में याचिका भी लगायी गयी थी। याचिका में वर्णित तथ्यों को गम्भीरता से लेते हुए सिविल न्यायाधीश क0ख0 रामकिशन शर्मा ने बदहाल सडकों की जांच के लिए मौका कमिश्रर भी नियुक्त किया। जिसने अपनी रिपोर्ट में सडकों की खस्ता हालत के बारे में बताया है। इस पर न्यायाधीश महोदय ने सम्बन्धित विभाग को सडकों को दुरूस्त कर रिपोर्ट करने के निर्देश दिये हैं।
समाधान 
सार्वजनिक निर्माण विभाग बजट के अभाव की बात कहकर राजमार्ग को दुरूस्त ना करवा पाने की अपनी मजबुरी पर रो रहा है लेकिन यह समस्या का समाधान नहीं है। वर्तमान में आवश्कता यह है कि सडक को इतना तो दुरूस्त कम से कम किया जाये कि गढ्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। सार्वजनिक निर्माण विभाग को केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, सांसद निधि, विधायक निधि, मंडी समिति, नगर परिषद आदि विविध साधनों से धनराशि प्राप्त हो सकती है। इस धनराशि का उपयोग पैचिंग वर्क  इत्यादि में किया जा सकता है। इसके अलावा जिला कलक्टर के पास स्व-विवेक का और आपदा राहत का कोटा भी होता है। जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक संस्थाऐं भी आगे आकर प्रशासनिक सहयोग से कार्य कर सकती है। अगर इन गढ्ढों में मिट्टी एवं कंकरीट भी डल जाये तो इसका अस्थायी समाधान तो हो सकता है।

No comments:

Post a Comment